Wednesday, 18 October 2017

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान समर्पित किया

     प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्र को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान समर्पित किया।
इस अवसर पर सम्बोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने धन्वंतरि जयंती को आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने के लिए जनसभा को बधाई दी। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना के लिए आयुष मंत्रालय की सराहना की। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि कोई भी देश अपने इतिहास और विरासत को महत्व और ध्यान दिए बिना प्रगति नहीं कर सकता। जो देश अपनी विरासत को पीछे छोड़ देते हैं वह अपनी पहचान भी खो देते हैं।
    

     प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत आजाद नहीं था तब योग और आयुर्वेद जैसी भारत की विरासत और ज्ञान सम्पदा का महत्व कम कर दिया गया था। यहां तक कि इन पर से भारतीयों के विश्वास को खत्म करने के प्रयास भी किये गए थे। उन्होंने कहा कि पिछले 3 वर्षों में इस स्थिति में काफी हद तक बदलाव आया है और लोगों का विश्वास हमारी विरासत में पुनर्स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद दिवस या योग दिवस के लिए एकत्र हुए लोगों को देखकर हमारी विरासत में गर्व प्रदर्शित होता है।

     प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद सिर्फ एक चिकित्सा पद्धति नहीं है बल्कि है सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण स्वास्थ्य को जजोड़ने वाली एक प्रणाली है, इसलिए सरकार ने आयुर्वेद , योग और अन्य आयुष पद्धतियों को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में शामिल करने के लिए बल दिया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश के प्रत्येक जिले में आयुर्वेद अस्पताल स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 3 वर्षों के दौरान 65 से भी अधिक आयुष अस्पतालों का विकास किया गया है ।

     प्रधानमंत्री ने कहा कि औषधीय और चिकित्सकीय पौधें वैश्विक रूप से आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। और भारत को इस संबंध में अपनी क्षमताओं का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दे दी है ।

     प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का ध्यान गरीबों के लिए किफायती स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली प्रदान करने के लिए केंद्रित है । उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य ध्यान निरोधात्मक स्वास्थ्य देखभाल और किफायतता तथा इलाज तक पहुंच में सुधार करना मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि निरोधात्मक स्वास्थ्य देखभाल के लिए स्वच्छता साधारण सा उपाय है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले 3 वर्षों में पांच करोड़ शौचालयों का निर्माण किया है।

     प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल लोगों की बेहतर पहुंच बनाने के लिए नए एम्स की स्थापना की जा रही है। उन्होंने स्टेंट और घुटना इम्प्लांट्स की कीमतों पर सीमा तथा किफायती कीमतों पर दवाईयां प्रदान करने के लिए जन औषधि केंद्रों की स्थापना जैसे उपायों का भी उल्लेख किया।

 

PIB

एक दिया शहीदों के नाम ...

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एक दिया शहीदों के नाम ...

ते सीमेवर लढले म्हणून

गावात आपल्या आज

दिवाळी आली आहे....

 

दिवा त्यांच्या घरातील विझवून

आपल्या घरी दिवाळी आली आहे...

 

तुमच्या आनंदा बरोबर

दुःख त्यांचे ही असू दया...

 

तुमच्य दारी एक दिवा

शाहीदांसाठी असू दया...

 

दिवाळी आपणास सुख समृध्दीची, आनंदाची, भरभराटीची आणि आरोग्यदायी जावो.

 

शुभेच्छुक

अॅड. सुरेन्द्र सोनवणे

9422264829

जय हिंद

भारत माता कि जय

 

 

सैनिकों के सम्मान में चायनीज़ वस्तुओं का करें बहिष्कार ।।

   पूर्व  सैनिक सेवा परिषद,जमशेदपुर  के तत्वावधान में आज शहर के साकची बाजार स्थित मुख्य गोलचक्कर पर चायनीज़ वस्तुओं के बहिष्कार करने  और विरोध प्रदर्शन के लिए एक पद यात्रा और शपथ का आयोजन किया गया जसमे सामूहिक रूप से ये निर्णय लिया गया कि सभी झारखंड के पूर्व सैनिक अपने अपने स्तर से सभी चायनीज़ वस्तुओं का बहिष्कार करेंगे  ताकि चीन भारत से कमाए हुए धन का इस्तेमाल हमारे ही फ़ौजी भाइयों के विरुद्ध पाकिस्तान को मदद कर के न कर सके। परिषद् के जिला अध्यक्ष  सार्जेंट पी शंकर ने कहा कि चीन 62 के युद्ध में पंचशील समझौते को ठुकरा कर हमारे पीठ में जो छुरा घोंपा है जिसमें हमारे बहुत सारे निहत्थे भारतीय सैनिक शहीद हुए थे उसका बदला हमलोग उसके वस्तुओं का बहिष्कार कर के लेंगे।

   आतंकवादी देश पाकिस्तान को चीन हथियार , धन , प्रशिक्षण तथा अन्य हर तरीक़े का मदद मुहैया करा रहा है जिसका उपयोग पाकिस्तान भारत के विरुद्ध  खुलेआम कर रहा है। इस अवसर पर मुख्या अतिथि के रूप में आये स्वदेशी जागरण मंच के संघर्ष वाहिनी प्रमुख श्री बन्दे शंकर सिंह ने कहा कि भारत से चीन का ट्रेड पिछले कुछ वर्षों में घटा ज़रूर है  लेकिन हमारी आर्थिक।नीतियों और दुनिया के संस्थानों के बंधंनके परिणास्वरप  राष्ट्रीय सुरक्षा के  अस्तित्व पर भी ख़तरा मंडरा रहा है। विशिस्ट अतिथि क्रीड़ा भारती के  प्रान्त मंत्री श्री राजीव कुमार जी ने कहा कि दुनिया के बाज़ार को अब हिंदुस्तानियों को देशभक्ति से मुकाबले का वक्त है,इसलिए यथसंभव हम सब  चीन निर्मित सामानों का विरोध करे , बहिष्कार करें।

   हम पूर्व सैनिकों को चाइना का विरोध और दुश्मनी साक्षात दिखता  है यह क़तई बर्दाश्त नहीं है की उसके द्वारा निर्मित वस्तुओं की बिक्री भारत में हो। हम सभी पूर्व सैनिक इसका विरोध और बहिष्कार करने के लिए कृतसंकल्पित हैं और सारे देशवासियों से भी आग्रह करते है कि वे भी इसके वस्तुओं का मज़बूती से बहिष्कार करें इससे हम चीन को आर्थिक कमज़ोरी तो देंगे ही साथ ही साथ हमारे ग़रीब कुम्हार भाइयों का मिट्टी का दिया बनाने का कुटीर उद्योग भी मज़बूत होगा। उपस्थित पूर्व सैनिकों और देशभक्तों ने  एक शपथ लिया कि इस दीपावली में दीपक का अधिकाधिक प्रयोग करेंगे। ज़िला  महामंत्री ने बताया कि विगत दिनों ही परिषद् ने दिव्यांग बच्चों के बनाये दीपक और मोमबत्तियां खरड़ कर इसकी शुरुआत कर दी है।

   आज के कार्यक्रम में लागभग 125 देशभसक्त  उपस्थित रहे जिनमें 40 पूर्व सैनिक बंधू और अपने अनुसांगिक क्षेत्र के कार्यकर्ता का सहयोग रहा।कार्यक्रम के अंत में में सारे पूर्व सैनिकों ने शहीदों को  श्रद्धांजलि दिया ।

कार्यक्रम में उपस्थित रहे।।।
पी संकर,सिद्धनाथ सिंह,तापस मजूमदार, रमेश शर्मा, सुरेंद्र सिंह,संतोष,सुखविंदर,सत्येन्द्र सिंह,कृष्मोहं सिंह,अनिल सिंह,जसबीर सिंह, सुबोध कुमार,राजेश,बिजेंद्र, दया भूषण,हवलदार बिरजू,शत्रुघ्न प्रसाद, अशोक वाजपेयी, पंकज सिंह,विश्वजीत,अजस्य सिंह, दयाल चन्द्र साहू, नविन कुमार,दयानंद सिंह,विश्वजीत,पंकज,डी अस तिवारी,जुगुन पांडेय,स्वाति मित्र,हेमलता,रीता दी,राजेश पाण्डे, राजेश कुमार,राजेश सिंह,ताराशंकर,सोनू गिरी,दया भूषण जी,

राजीव कुमार,अनूप राजा,सतनाम सिंह,प्रमोद मिश्रा,प्रदीप जी,अखिल कुमार,गणेश जैस्वाल, वाईस ऑफ़ ह्यूमैनिटी के हरी सिंह, बजरंग सेवा संस्थान के सागर,सौरव,विशाल,

धन्यवाद ज्ञापन हवलदार सत्येन्द्र सिंह,वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने किया।

पी शंकर
अध्यक्ष

Tuesday, 17 October 2017

रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आईएनएस क्लिटन को नौसेना में शामिल किया

     रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज 16 अक्टूबर 2017 को नौसेना डॉकयार्ड विशाखापट्नम में संपन्न एक भव्य समारोह में आईएनएस क्लिटन (पी 30), तीसरी एंटी-पनडुब्बी वारफेयर (एएसडब्लू), जिसे प्रोजेक्ट 28 (कमोर्टे क्लास) के तहत बनाया गया है, को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा, वाइस एडमिरल एच सी एस बिष्ट, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ पूर्वी नौसेना कमांड रेयर एडमिरल वी के सक्सेना (सेवानिवृत), गार्डन रिच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकता (जीआरएसई), कोलकता के सीएमडी कॉमोडोर एन बी कुंते (सेवानिवृत), पूर्व क्लिटन के पहले कमांडिंग ऑफिसर तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस समारोह को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना के इन-हाउस संगठन नौसैनिक डिजाइन निदेशालय तथा गार्डन रिच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकता द्वारा तैयार किए गए चार एएसडब्ल्यू कार्वेट्स के तीसरे नौसेना में शामिल होने के लिए चिह्नित किया गया है।


     नौसेना जेटी में माननीय रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की आगवानी नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा ने की। इस समारोह के शुरू होने से पहले माननीय रश्रा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया गया और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात कराया गया।


     सभा का स्वागत करते हुए एडमिरल सुनील लंबा ने कहा कि यह भारतीय युद्धपोत की यात्रा में एक और मील का पत्थर है। भारतीय नौसेना स्वदेशीकरण के सिद्धांत तथा सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ के प्रति प्रतिबद्ध है। पिछले साल जो चार युद्धपोत भारतीय नौसना में शामिल किए गये थे वे सभी भारत में ही निर्मित हैं जो हमारे ‘मेक इन इंडिया’ संकल्प का बेहतर प्रमाण हैं। स्वदेशीकरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के कारण ही हमने अपने इस दायरे को आगे बढ़ाया है और साथ ही युद्धपोत बनाने में भी हम आगे बढ़ रहे हैं। हमने स्वदेशी सोनार जैसे अभय, हमसा-एनजी के साथ शस्त्र वरूणास्क्षत्र एवं ब्रह्मोस में भी काफी सफलता हासिल की है। एडमिरल ने कहा कि ये उपलब्धियां आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के भारतीय नौसेना के सक्रिय और एकीकृत दृष्टिकोण का एक सफल परिणाम है। इसके बाद कमांडिंग ऑफिसर कमांडर नौशाद अली खान ने युद्धपोत के कमीशनिंग वारंट को पढ़ा। इसके बाद पहली बार इस नौसेना एनसाइन युद्धपोत पर राष्ट्रीय गान के साथ समारोह का समापन किया गया।

     आईएनएस क्लिटन को भारतीय नौसेना में शामिल करने के अवसर पर माननीय रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने भारतीय नौसेना, जीआरएसई, अन्य भारतीय पीएसयू तथा छोटे एवं मध्यम उद्योगों जिसने भी इस युद्धपोत के निर्माण में सहयोग दिया, सबका आभार व्यक्त किया।उन्होंने जोर देते हुए कहा कि स्वदेशीकरण के माध्यम से नौसेना की आत्मनिर्भरता के प्रति यह कदम बेहद ही सराहनीय है और इसने भारतीय नौसेना को खरीदार से एक निर्माता के रूप में बदल दिया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि नौसेना के बेड़े में आईएनएस क्लिटन को शामिल करना इस परिवर्तन की पुन: पुष्टि करता है। उन्होंने आगे कहा कि हमें अपने युद्धपोत निर्माण कार्यों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर तथा कम समय सीमा में और प्रतिस्पर्धी बना गुणवत्ता वाले युद्धपोतों के उत्पादन करने की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार सशस्त्र बलों और रक्षा उद्योग के लिए राष्ट्र की रक्षा आवश्यकताओं और अपेक्षित वित्तपोषण की सराहना करती है तथा जो नौसेना के आधुनिकीकरण और विकास योजनाओं के लिए बेहद आवश्यक है। बाद में रक्षा मंत्री ने कमिशनिंग प्लेक का अनावरण किया और युद्धपोत को देश को समर्पित किया।


     इसे एक बेहद प्रतिष्ठित अधिग्रहण मानते हुए, आईएनएस क्लिटन को भारत में निर्मित सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में से एक माना गया है। इस युद्धपोत की अवधारणा 10 अगस्त 2010 को रखी गई थी और 26 मार्च 2013 को इसकी शुरूआत की गई थी। इसके पहले समुद्री परीक्षण की शुरुआत 6 मई 2017 को हुई थी तथा आखिरकार 14 नवंबर 2017 को जीआरएसई द्वारा इसे भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया था। यह युद्धपोत डीजल एंड डीजल (सीओडीएडी) के प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित है जिसमें 25 समुद्री मील से अधिक गति हासिल करने के लिए चार डीजल इंजन की व्यवस्था होती है और लगभग 3500 नौटिकल मील की सहनशक्ति क्षमता है।

     परमाणु, जैविक और रासायनिक (एनबीसी) युद्ध की स्थितियों में लड़ने में सक्षम इस युद्धपोत में 80 फीसदी से अधिक उपकरण और प्रणाली स्वदेशी निर्मित है। इसके साथ ही, पी -28 हथियार और संवेदी क्षमता मुख्य रूप से स्वदेशी है और यह इस क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित करता है। आईएनएस क्लिटन पूरी तरह से मिश्रित सामग्री के अधोसंरचना के साथ पहला प्रमुख युद्धपोत है।


     इस प्रमुख युद्धपोत पर पहली बार समग्र अधिरचना पर आधारित हथियार और सेंसर स्थापित किए गए हैं। आईएनएस क्लिटन पर लगाए गए समग्र अधिरचना ने भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर उन्नत इंजीनियरिंग सामग्रियों के उपयोग को वजन और स्थिरता मानकों में महत्वपूर्ण सुधार के साथ उपयोग किया है।


     एएसडब्लू सक्षम हेलिकॉप्टर के अलावा हथियारों में भारी वजन टारपीडो, एएसडब्ल्यू रॉकेट, 76 एमएम कैलिबर मिडियम रेंज बंदूक और दो बहु-बैरल 30 एमएम बंदूकें शामिल हैं जो जिसमें क्लोज-इन-वेपन सिस्टम (सीआईडब्ल्यूएस) के रूप में समर्पित अग्नि नियंत्रण प्रणाली है।

     युद्धपोत का नाम पुराने आईएनएस क्लिटन (पी 79) एक पेट्या क्लास एएसडब्ल्यू युद्धपोत से लिया गया है जिसे 18 वर्ष की सेवा के बाद जून 1987 को बंद कर दिया गया था। लक्षद्वीप समूह के द्वीपों से संबंधित कोरल द्वीप के नाम पर इस युद्धपोत का नाम रखा गया जिसमें 15 अधिकारियों और 180 नाविकों की क्षमता है। 109 मीटर लंबा, 14 मीटर चौड़ा तथा 3300 टन के विस्थापन क्षमता के साथ भारत में निर्मित सबसे शक्तिशाली एंटी पनडुब्बी युद्धपोतों में से इसे एक माना जा सकता है।

     आईएनएस क्लिटन के शामिल होने से भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के एएसडब्ल्यू क्षमता में एक नया आयाम जोड़ देगा। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की बढ़ी हुई बहुआयामी क्षमता को प्रतिबिंबित करती है।

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वीके/पीकेपी/एसकेपी -5081

Ek Panati

 

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