नायब
सुबेदार माम चन्द्र शर्मा
, वीर चक्र (मरणोपरान्त)
पूर्वी
पाकिस्तान को लेकर दोनों
देशों में तनातनी चल
रही थी। दिनों दिन
पूर्वी पाकिस्तान से आ रहे
शरणार्थियों का बोझ बढ़ता
जा रहा था। पाकिस्तान
चाहता था कि पूर्वी
पाकिस्तान में जो अत्याचार
हो रहा था भारत
उस पर चुप रहे।
इसी मसले को लेकर
03 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी वायु सेना ने
हमारे एयरफोर्स स्टेशनों पर एक साथ
हमला बोल दिया। सीमा
पर काफी पहले से
छुटपुट जमीनी लड़ाई चल रही
थीं । 10 महार रेजिमेंट
81 माउंटेन ब्रिगेड की कमान में
पूर्वी पाकिस्तान के शमशेर नगर
के पास तैनात थी
। इस यूनिट को
शत्रु के एक मोर्चे
पर कब्जा करने का कार्य
सौंपा गया, यह मोर्चा
चट्लापुर में एक चाय
का कारखाना था, जिसे पाकिस्तानी
सेना ने मीडियम मशीन
गनों से सुरक्षित कर
अपना मोर्चा बना रखा था।
नायब
सूबेदार माम चन्द्र शर्मा
10 महार रेजिमेंट की एक प्लाटून
के प्लाटून कमांडर थे। उन्हें दुश्मन
के मोर्चे पर आक्रमण करने
का आदेश मिला। यहाँ
शत्रु बहुत ही मजबूत
स्थिति में था, उसके
पास मीडियम मशीन गर्ने भी
थीं। नायब सूबेदार माम
चन्द्र शर्मा की प्लाटून आगे
बढ़ रही थी। इसी
दौरान उनकी प्लाटून पर
ऊपरी मंजिल से मशीनगन से फायरिंग होने
लगी, जिससे उनकी प्लाटून को
भारी नुकसान होने लगा। अपने
जवानों का नुकसान होते
देख नायब सूबेदार माम
चन्द शर्मा का खून खौल
उठा। उन्होंने अपने जवानों को
उत्साहित करते हुए मोर्चे
पर हमला बोल दिया।
दोनों ओर से भीषण
गोलीबारी होने लगी। इसी
बीच उनकी छाती में
एक गोली लग गयी
और वह घायल हो
गए। अपनी चोटों की
परवाह किए बिना वे
दुश्मन से लड़ते रहे।
उन्होंने प्लाटून पर फायरिंग कर
रहे पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया।
ज्यादा घायल होने के
कारण वह युध्द भूमि
में ही वीरगति को
प्राप्त हो गये। उनके
साहस और वीरता के लिए उन्हें
30 नवम्बर 1971 को मरणोपरान्त वीर चक्र से
सम्मानित किया गया।
नायब
सूबेदार माम चन्द्र शर्मा
का जन्म 06 जुलाई 1930 को जनपद मेरठ
के गांव बाबतपुर दबथवा
में श्रीमती बसन्ती देवी तथा श्री
किशोरी लाल के यहां
हुआ था। वह 06 अक्टूबर
1931 को भारतीय सेना की महार
रेजिमेंट में भर्ती हुए
और महार प्रशिक्षण केंद्र,
सागर से प्रशिक्षण पूरा
करने के बाद 10 महार
रेजिमेन्ट में तैनात हुए।
इनके माता पिता की
मृत्यु हो चुकी है।
इनके परिवार में इनके भाई
के पुत्र जय गोपाल शर्मा
की पत्नी और दो छोटे
बच्चे है। नायब सूबेदार
माम चन्द्र शर्मा का विवाह नहीं
हुआ था। इनकी वीरता
और बलिदान की याद में
इनके गांव के स्कूल
का नामकरण इनके नाम पर
किया गया है।
- हरी
राम यादव
सूबेदार
मेजर (आनरेरी)
अयोध्या/
लखनऊ
7087815074
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