Tuesday, 2 June 2015

एयर मार्शल बीरेन्द्र सिंह धनोआ एवीएसएम वाईएसएम वीएम : वायु सेना के उप-प्रमुख


एयर मार्शल बीरेन्द्र सिंह धनोआ एवीएसएम वाईएसएम वीएम ने वायु सेना के उप-प्रमुख का कार्य भार संभाला

एयर मार्शल बीरेन्द्र सिंह धनोआ एवीएसएम वाईएसएम वीएम ने 1 जून, 2015 को वायु सेना के उप-प्रमुख (वीसीएएस) का कार्य भार संभाला है। उन्हें जून 1978 में भारतीय वायु सेना में एक लड़ाकू पाइलट के रूप में कमीशन दिया गया था। वे राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन के छात्र रहे हैं।
एयर मार्शल धनोआ एक योग्य फ्लाइंग प्रशिक्षक हैं और उन्होंने अपने प्रतिष्ठित कैरियर के दौरान अनेक प्रकार के लड़ाकू विमान उड़ाए हैं। करगिल युद्ध के दौरान उन्होंने लड़ाकू स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया और स्वयं पहाड़ी इलाकों में अनेक रात्रि कालीन मिशन उड़ानें भरी।
 उन्हें लड़ाकू बेस के स्टेशन कमांडर और विदेश में भारतीय सैन्य प्रशिक्षण दल के नेता सहित अनेक महत्वपूर्ण परिचालन नियुक्तियों का कार्यभार संभालने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज वैलिंगटन के मुख्य प्रशिक्षक (वायु), वायु सेना मुख्यालय में एयर स्टाफ (इंटेलिजेंस) के सहायक प्रमुख और दो परिचालन कमानों के सीनियर एयर स्टाफ आफिसर के पदों पर भी कार्य किया है। वायु सेना के उप-प्रमुख के रूप में नियुक्ति से पूर्व वे दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान के एयर आफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे।  उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति ने इन्हें 1999 में युद्ध सेवा मैडल (वाईएसएन), वायु सेना मेडल (वीएन) और 2015 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) प्रदान किये। एयर मार्शल श्री धनोआ एयर मार्शल रविकांत शर्मा पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएम एडीसी के स्थान पर वायु सेना उप-प्रमुख बने हैं, जो 40 वर्ष की शानदार सेवा के बाद 31 मई, 2015 को सेवानिवृत्त हुए हैं।

एयर मार्शल रविंदर कुमार धीर दक्षिण पश्चिमी वायु सेना कमान के एयर ऑफि‍सर कमांडिंग-इन-चीफ

एयर मार्शल रविंदर कुमार धीर ने 01 जून 2015 को दक्षिण पश्चिमी वायु सेना कमान के एयर ऑफि‍सर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार संभाला


एयर मार्शल रविंदर कुमार धीर ने 01 जून, 2015 को दक्षिण पश्चिमी वायु सेना कमान (एसडब्‍ल्‍यूएसी) के एयर ऑफि‍सर कमांडिंग-इन-चीफ (एओसी-इन-सी) का पदभार संभाल लिया। मुख्‍यालय एसडब्‍ल्‍यूएसी पहुंचने पर एयर मार्शल ने औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया और शीर्ष पदाधि‍कारियों से भेंट की। एसडब्‍ल्‍यूएसी के एयर ऑफि‍सर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कमान संभालने के बाद उन्‍होंने सभी कर्मियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्‍होंने वायु सेना के सभी योद्धाओं से अत्‍यंत सुरक्षा के साथ निर्धारित जिम्‍मेदारियों का निर्वहन करते हुए पूर्ण समर्पण के साथ उच्‍चस्‍तरीय परिचालन क्षमता हासिल करने के अपने अथक प्रयास आगे भी जारी रखने का आग्रह किया।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खडकवासला के एक पूर्व छात्र रह चुके एयर मार्शल रविंदर कुमार धीर 15 जून 1979 को आईएएफ के फाइटर (योद्धा) संवर्ग में शामिल किए गए थे। एयर मार्शल ने 36 वर्षों के अपने लंबे कार्यकाल के दौरान 25 से भी ज्‍यादा तरह के विमानों से 3200 घंटे से भी अधि‍क अवधि‍ तक उड़ान भरी है। एयर मार्शल रविंदर कुमार धीर को अपनी उत्‍कृष्‍ट सेवा के लिए भारत के राष्‍ट्रपति‍ द्वारा 'वायु सेना मेडल' और 'अति‍ वि‍शि‍ष्‍ट सेवा मेडल' से नवाजा जा चुका है। एयर मार्शल रविंदर कुमार धीर को परिचालन एवं प्रायोगिक परीक्षण उड़ान में काफी लंबा एवं विविध अनुभव है। वह एक योग्य फ्लाइंग (उड़ान) प्रशिक्षक एवं एक प्रायोगिक परीक्षण पॉयलट हैं। उन्‍होंने एयर फोर्स टेस्‍ट पॉयलट स्‍कूल की कमान संभाली है। 'एडीई' में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 'एलसीए' परियोजना के लिए बहुमूल्य जानकारी प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एयर मार्शल रविंदर कुमार धीर रूस में 'बिसॉन' उन्‍नयन परियोजना टीम के प्रोजेक्‍ट टेस्‍ट पॉयलट रह चुके हैं।

Saturday, 30 May 2015

OROP : वन रँक वन पेन्शन’ म्हणजे काय?

मुंबई : जवान आपल्या प्राणांची बाजी लावून देशाची सेवा करतात. मात्र, निवृत्तीनंतरच्या आयुष्यात त्यांना अत्यंत हलाखीचे जीवन जगावं लागतं... जगण्यासाठी त्यांना संघर्ष करावा लागतो. त्यामुळे अशा सैनिकांना पेन्शन हे एकमेव आधार ठरतं. मात्र, या पेन्शनमध्येही अनेक निवृत्त सैनिकांवर अन्याय होतो. अशा सैनिकांसाठी वन रँक वन पेन्शन’ ही योजना महत्त्वाची ठरु शकते.

लोकसभा निवडणुकीच्या तोंडावर काँग्रेसचे उपाध्यक्ष राहुल गांधी यांनी ‘वन रँक वन पेन्शन’ लागू करण्याची घोषणा केली होती. त्यानंतर तत्कालीन अर्थमंत्री पी. चिदंबरम यांनी अर्थसंकलात या योजनेसाठी तरतूदही केली होती. निवडणुकीच्या प्रचारादरम्यान नरेंद्र मोदींनीही माजी सैनिकांची ही मागणी सत्तेत आल्यावर पूर्ण करू, असे आश्वासन दिले होते. मोदी सरकार सत्तारूढ झाले. मात्र, योजनेकडे मोदी सरकारनंही दुर्लक्ष केले. त्यानंतर विरोधक म्हणून राहुल गांधींनी पुन्हा या योजनेचा पाठपुरावा करण्यासा सुरुवात केली आहे.

याचदरम्यान, माजी सैनिकांनी शुक्रवारी ‘वन रँक वन पेन्शन‘साठी आंदोलन केले. तसेच काही दिवसांपूर्वी काँग्रेसचे उपाध्यक्ष राहुल गांधींचीही माजी सैनिकांनी भेट घेतली होती. त्यामुळे पंतप्रधान मोदींनीही हे सर्व गंभीरपणे घेतले आणि स्वत: पंतप्रधान मोदींनी ट्विटरवरून ‘वन रँक वन पेन्शन‘सुरू करण्याबाबत सरकार कटिबद्ध असल्याचे सांगितले आहे. तसेच ही योजना लागू करण्याबाबत कोणच्याही मनात शंका नसल्याचे म्हटले आहे. शिवाय संरक्षणंत्री मनोहर पर्रिकरांनीही पुण्यात या योजनेबाबत माजी सैनिकांना आश्वसन दिले आहे.

‘वन रँक वन पेन्शन’ म्हणजे काय?

वन रँक वन पेन्शन म्हणजे वेगवेगळ्या वर्षी निवृत्त झालेल्या मात्र एकाच रँकच्या सैनिकांच्या पेन्शनच्या रकमेत जास्त फरक नसावा किंबहुना ती रक्कम सारखीच असावी. सध्या परिस्थिती अशी आहे की, आधी निवृत्त झालेल्या एकाच रँकच्या लष्करी अधिकाऱ्याला कमी पेन्शन आणि नंतर निवृत्त झालेल्या त्याच रँकच्या अधिकाऱ्याला जास्त पेन्शन मिळतं.

हे कसं ते आपण एका उदाहरणावरुन पाहूया. 2006 साली निवृत्त झालेल्या मेजर जनरलची पेन्शन 30,300 रुपये आहे, तर आता कुणी कर्नल निवृत्त झाल्यास त्याला 34,000 रुपये पेन्शन मिळते. वस्तुत: मेजर जनरल हा कर्नल पदाच्या दोन रँक वरचा अधिकारी असतो.

एकाच रँकच्या पेन्शनमधील ही असमानता केवळ लष्करी अधिकाऱ्यांपर्यंतच मर्यादित नाही. तर शिपाई, नाईक आणि हवालदार रँकचे सैनिकही या असमानतेला बळी पडले आहेत.

वन रँक वन पेन्शन म्हणजे सेवनिवृत्त सैनिकांना आता समान पेन्शन असेल. देशात दरवर्षी सुमारे 65 हजार सैनिक निवृत्त होतात. म्हणजेच देशात या घडीला 25 लाख निवृत्त सैनिक आहेत.

‘वन रँक वन पेन्शन’साठी याआधीही प्रयत्न

गेल्या अनेक वर्षांपासून ‘वन रँक वन पेन्शन’ योजनेची सेवानिवृत्त सैनिकांकाडून मागणी होत आहे. सुमारे 30 वर्षांपूर्वी निवृत्त सैनिकांनी निवृत्त सैनिकांची एक संघटना बनवली होती. मात्र सातत्याने मागणी करुनही सरकारने सैनिकांच्या मागणीकडे दुर्लक्ष केलं. मात्र 2008 मध्ये इंडियन एक्स सर्व्हिसमन मूव्हमेंट (IESM) नावाच्या संघटनेने योजनेसाठीचं आंदोलन अधिक तीव्र केलं.

2009 मध्ये तर सैनिकांनी उपोषणही सुरु केलं होतं. तत्त्कालिन राष्ट्रपतींकडे आंदोलक सैनिकांनी आपापली पदकं परत केली होती. एवढंच नव्हे, तर दीड लाख माजी सैनिकांनी रक्ताची स्वाक्षरी करुन तत्कालिन राष्ट्रपती प्रतिभा पाटील यांना पत्र पाठवलं होतं. दरम्यान, पंजाब आणि हिमाचल प्रदेशच्या राज्य सरकारनी ‘वन रँक वन पेन्शन’ योजनचं प्रस्ताव मंजूर करुन सैनिकांच्या मागणीला समर्थन दिलं होतं.
 

2014 च्या निवडणुकीत प्रचारादरम्यान नरेंद्र मोदींनीही सैनिकांच्या समान पेन्शनचा म्हणजेच ‘वन रँक वन पेन्शन’चा मुद्दा उचलला होता. एकाच रँकच्या सैनिकांना समान पेन्शन देण्याचं आश्वासन मोदींनी दिलं होतं. विशेष म्हणजे मोदींची पंतप्रधानपदाचा उमेदवार म्हणून घोषणा झाल्यानंतर पहिल्याच सभेत त्यांनी सैनिकांच्या निवृत्तीवेतनाच्या मुद्द्यावर भाष्य केलं होतं. मात्र मोदी सरकार सत्तारुढ होऊन एक वर्ष उलटला तरीही अद्याप ‘वन रँक वन पेन्शन’ योजनेबद्दल मोदींनी चकार शब्दही काढला नव्हता. मात्र गेल्या काही दिवसांपासून राहुल गांधी ‘वन रँक वन पेन्शन’साठी सरकारकडे पाठपुरावा करत आहेत. या मुद्द्यावर मोदींवर टीकेची झोड उठवत आहेत. त्यामुळेच स्वत: पंतप्रधान मोदींनी ट्विटरवरुन ‘वन रँक वन पेन्शन‘सुरू करण्याबाबत सरकार कटिबद्ध असल्याचे सांगितले आहे.
 

By  नामदेव काटकर, एबीपी माझा, मुंबई
Saturday, 30 May 2015 03:52 PM 

Friday, 15 May 2015

Sainik Darpan May 2015


प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना



युवा सशक्‍तिकरण की नई दिशा


       किसी भी देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए कौशल और ज्ञान दो प्रेरक बल हैं। वर्तमान वैश्‍विक माहौल में उभरती अर्थव्‍यवस्‍थाओं की मुख्‍य चुनौती से निपटने में वे देश आगे हैं जिन्‍होंने कौशल का उच्‍च स्‍तर प्राप्‍त कर लिया है।



 किसी भी देश में कौशल विकास कार्यक्रम के लिए मुख्‍य रूप से युवाओं पर ही जोर होता है। इस मामले में हमारा देश अच्‍छी स्‍थिति में है। जनसंख्‍या का एक बड़ा हिस्‍सा उत्‍पादक आयु समूह में है। यह भारत को सुनहरा अवसर प्रदान करता है, परंतु एक बड़ी चुनौती भी पेश करता है। हमारी अर्थव्‍यवस्‍था को इसका लाभ तभी मिलेगा जब हमारी जनसंख्‍या विशेषकर युवा स्‍वस्‍थ, शिक्षित और कुशल होगी।



भारत के पास एक अतुलनीय युवा जनसंख्‍या है जिससे आने वाले समय में सामाजिक-आर्थिक विकास को जोरदार बढ़ावा मिलना तय है। हमारे पास 60.5 करोड़ लोग 25 वर्ष से कम आयु के हैं। रोजगार के लिए उपयुक्‍त कौशल प्राप्‍त करके ये युवा परिवर्तन के प्रतिनिधि हो सकते हैं। वे न केवल अपने जीवन को प्रभावित करने के काबिल होंगे बल्‍कि दूसरों के जीवन में भी बदलाव ला सकेंगे।



हाल में ही मंजूर की गई प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) युवाओं के कौशल प्रशिक्षण के लिए एक प्रमुख योजना है। इसके तहत पाठ्यक्रमों में सुधार, बेहतर शिक्षण और प्रशिक्षित शिक्षकों पर विशेष जोर दिया गया है। प्रशिक्षण में अन्‍य पहलुओं के साथ व्‍यवहार कुशलता और व्‍यवहार में परिवर्तन भी शामिल है।



नवगठित कौशल विकास और उद्यम मंत्रालय राष्‍ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के माध्‍यम से इस कार्यक्रम को क्रियान्वित कर रहा है। इसके तहत 24 लाख युवाओं को प्रशिक्षण के दायरे में लाया जाएगा है। कौशल प्रशिक्षण नेशनल स्‍किल क्‍वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्‍यूएफ) और उद्योग द्वारा तय मानदंडों पर आधारित होगा। कार्यक्रम के तहत तृतीय पक्ष आकलन संस्‍थाओं द्वारा मूल्‍यांकन और प्रमाण पत्र के आधार पर प्रशिक्षुओं को नकद पारितोषिक दी जाएगी। नकद पारितोषिक औसतन 8,000 रूपए प्रति प्रशिक्षु होगी।



कौशल प्रशिक्षण एनएसडीसी द्वारा हाल ही में संचालित कौशल अंतर अध्‍ययनों के जरिए मांग के आकलन के आधार पर दिया जाएगा।



केन्द्र और राज्य सरकारों, उद्योग और व्यावसायिक घरानों से विचार विमर्श कर भविष्‍य की मांग का आकलन किया जाएगा। इसके लिए एक मांग समूहक मंच भी शुरू किया जा रहा है।



कौशल विकास के लक्ष्‍य निर्धारित करते समय हाल में ही लागू किये गय प्रमुख कार्यक्रम जैसे कि 'मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन और स्‍वच्‍छ भारत अभियान के मांगों को भी ध्‍यान में रखा जाएगा।



प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत मुख्‍य रूप से श्रम बाजार में पहली बार प्रवेश कर रहे लोगों पर जोर होगा और विशेषकर कक्षा 10 व 12 के दौरान स्‍कूल छोड़ गये छात्रों पर ध्‍यान केंद्रित किया जाएगा। योजना का क्रियान्‍वयन एनएसडीसी के प्रशिक्षण साझेदारों द्वारा किया जाएगा। वर्तमान में लगभग 2,300 केंद्रों के एनएसडीसी के 187 प्रशिक्षण साझेदार हैं। इनके अलावा केंद्र व राज्‍य सरकारों से संबंधित प्रशिक्षण प्रदाता संस्‍थाओं को भी इस योजना के तहत प्रशिक्षण के लिए जोड़ा जाएगा। सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को इस योजना के लिए योग्‍य होने के लिए एक जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा। पीएमकेवीवाई के तहत सेक्‍टर कौशल परिषद व राज्‍य सरकारें भी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निगरानी करेंगे।



योजना के तहत एक कौशल विकास प्रबंधन प्रणाली (एसडीएमएस) भी तैयार की जाएगी जो सभी प्रशिक्षण केंद्रों के विवरणों और प्रशिक्षण व पाठ्यक्रम की गुणवत्‍ता की जांच करेगी और उन्हें दर्ज भी करेगी। जहां तक संभव होगा प्रशिक्षण प्रक्रिया में बायोमिट्रिक सिस्‍टम व वीडियो रिकार्डिंग भी शामिल की जाएगी जो पीएमकेवीआई से जानकारी ली जाएगी जो पीएमकेवीआई की प्रभावशीलता का मूल्‍यांकन का मुख्‍य आधार होंगे। शिकायतों के निपटान के लिए एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र भी शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए एक ऑनलाइन नागरिक पोर्टल भी शुरू की जाएगी।



कुल 1120 करोड़ रुपए के परिव्यय से 14 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा और इसमें पूर्व शिक्षा-प्रशिक्षण को चिह्नित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस मद में 220 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। युवाओं को जुटाने तथा जागुरुकता फैलाने के लिए 67 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। युवाओं को कौशल मेलों के जरिए जुटाया जाएगा और इसके लिए स्थानीय स्तर पर राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, पंचायती राज संस्थाओं और समुदाय आधारित संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा।



      कौशल व उद्यम विकास वर्तमान सरकार की उच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नवगठित कौशल व उद्यम विकास मंत्रालय की '' मेक इन इंडिया'' अभियान के लक्ष्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका है। यह अभियान भारत को एक विनिर्माण केन्द्र के रूप में परिवर्तित करने के लिए अहम पहल है। विकासशील अर्थव्यवस्था के विनिर्माण क्षेत्र समेत सभी क्षेत्रों की मांग के अनुसार प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करने में इस मंत्रालय की अहम भूमिका है।



      इस दिशा में उठाये गए सभी उपायों को शामिल करने के लिए एक नयी राष्ट्रीय कौशल व उद्यम विकास नीति भी तैयार की गयी है। इस नीति के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले कार्यबल के साथ विकास को बढ़ावा देने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। वर्ष 2022 तक 50 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।



      इस दिशा में प्रयास मिशन के तौर पर किया जा रहा है। राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन के तहत तीन संस्थान कार्य कर रहे हैं। राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कौशल विकास प्रयासों को नीतिगत दिशा दे रही है और इनकी समीक्षा भी कर रही है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कौशल विकास समन्वय प्रधानमंत्री की परिषद के नियमों को लागू करने के लिए रणनीतियों पर कार्य कर रहा है। एनएसडीसी एक गैर-लाभ कंपनी है और गैर संगठित क्षेत्र समेत श्रम बाजार के लिए कौशल प्रशिक्षण की जरुरतों को पूरा कर रही है। 



भारत ने विश्व में सबसे तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बना ली है। उम्मीद है कि भारत शीघ्र ही विश्व की तीन सबसे बड़े अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगा। वर्ष 2020 तक भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा विनिर्माण केन्द्र भी बन जाएगा। जनसंख्या के सकारात्मक कारकों और उच्च गुणवत्ता वाले कार्यबल की सतत उपलब्धता की मदद से हमारा देश विश्व अर्थव्यवस्था में विशेष छाप छोड़ सकता है।



 भविष्य के बाजारों के लिए कौशल विकास से लेकर मानव संसाधन विकसित करने के लिए हाल में ही घोषित प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से अवश्य ही हमारी अर्थव्यवस्था को पूर्ण लाभ मिलेगा। नई नीति के तहत मिशन के तौर पर लागू की गई यह योजना मानव संसाधन और उद्योग के विकास में एक नए युग की शुरुआत करेगी।


सुश्री अर्चना दत्ता एक स्वतंत्र लेखिका हैं और पूर्व महानिदेशक, डीडी न्यूज और महानिदेशक, एनएसडी (एआईआर) हैं।