Wednesday, 19 February 2025

न सांगीतले गेलेले छत्रपती...!!!

सांगीतले गेलेले छत्रपती...!!!

 

छत्रपती शिवाजी महाराजांबाबत प्रमुख्याने फक्त या तीनच गोष्टी सांगितल्या जातात....!

1.अफजलखानाचा कोथळा 

2.शाहीस्तेखानाची बोटे आणि

3.आग्र्याहुन हून सुटका

 

पण मला भावलेले छत्रपती शिवाजी महाराज अनेक अंगाने समजून घ्यावेसे वाटतील....!

 

1. आपल्या आईला जिजाऊ मॉसाहेबांना सती जाण्यापासून रोखणारे छत्रपती शिवाजी महाराज "सामाजिक क्रांती" करणारे होते...!

 

2. रयतेच्या भाजीच्या देठालासुद्धा हात लावता कामा नये हा आदेश देणारे "लोकपालक" राजे होते...!

 

3. सर्व प्रथम हातात तलवारीबरोबरच पट्टी घेऊन जमीन मोजून तिची नोंद त्यांनी ठेवायला चालू केली असे "उत्तम प्रशासक" होते...!

 

4. विनाकारण विना मोबदला झाडं तोडल्यास नवीन झाड लावून जगवण्याची शिक्षा देणारे "पर्यावरण रक्षक" होते...!

 

5. समुद्र प्रवास करण्यास हिंदू धर्मात बंदी होती तो विरोध पत्करून आरमार उभे केले आधुनिक नौदलाचा पाया रचून धर्मा पेक्षा देश मोठा हा संदेश देणारे "स्व-धर्मचिकित्सक" होते ...!

 

6. मुहूर्त पाहता, अशुभ मानल्या गेलेल्या अमावस्येच्या रात्री सर्व लढाया करुन त्या सर्वच्या सर्व लढाया जिंकून  "अंधश्रध्दा निर्मुलनाचा संदेश देणारे  चिकीत्सक राजे"

 

7. ३५० वर्षांपूर्वी छत्रपती शिवरायांनी सुरु केलेली शिवकालीन पाणी साठवण व्यवस्था आजही तितकीच प्रभावी आहे ! "जलतज्ञ" राजे छत्रपती शिवराय!!

 

8. ३५० वर्षांपूर्वी दळणवळणाचे कोणतेही साधन नसताना अभेद्य असे  १०० राहून अधिक गडकिल्ल्यांचे निर्माते, "उत्तम अभियंते राजे"

 

9. सर्व जातीधर्मातल्या मावळ्यांना समान न्याय देत सामाजिक क्रांतीचा पाया रचणारे राजे!!

 

10. परस्त्री मातेसमान मानत महिलांना  सन्मानाने वागवाणारे "मातृभक्त, नारीरक्षक" छत्रपती शिवराय

 

11. संपुर्ण विश्वात फक्त छत्रपती शिवरायांच्या दरबारातच मनोरंजनासाठी कोणतीही स्री नर्तीका नाचवली गेली नाही की मद्याचे प्याले ही रिचवले गेले नाहीत 

 

खऱ्या अर्थाने ते "लोकराजे" होते कारण ते धर्म जातीच्या पलीकडे जाऊन सुखी जनतेचे स्वप्न पहात होते हीच खरी शिवशाही होती.....!

 

 

तमाम शिवप्रेमी बांधवांना शिवजन्मोत्सवाच्या सहस्त्र कोटी शिवसदिच्छा 🚩🚩🚩

 

Friday, 7 February 2025

Meeting Ex Servicemen

AGENDA POINTS FOR MEETING WITH SECRETARY GENERAL ADMINISTRATION DEPT , MAHARASHTRA AND EX SERVICEMEN WELFARE WITH RETIRED AIR FORCE PERSONNEL

Dear All, 


Below is extract from the mail on Ex Servicemen meeting 

 All Ex Servicemen are requested to share any inputs/ suggestions/ opinions regarding welfare of Ex Servicemen  settled in Maharashtra to rpcmc@nic.in by 11 Feb 25 as desired by HQ MC, IAF Welfare Section. A meeting is scheduled to be planned at HQ MC, IAF Nagpur with the Secretary General Administration Dept, Maharashtra Govt. Date of meeting will be intimated soon.


Points/ Inputs/ Suggestions/ Opinions shared by you will be forwarded to HQ MC, IAF  and same will be included as Agenda points in the meeting.

For any further query, please contact to below mentioned Office number.

With regards,

Team Regional Placement Cell, Pune
9 BRD, AF
020-26630173/ 020-26630195

Monday, 21 October 2024

नेताजी सुभाष को नमन, आजाद हिंद सरकार स्थापना दिवस

 आज दिनांक 21/10/24 को अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद जमशेदपुर ने अपने सुप्रीम कमांडर सुभाष चन्द्र बोस जी के आजाद हिंद सरकार स्थापना दिवस का आयोजन नेताजी सुभाष मैदान साकची में किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के जमशेदपुर जिला महामंत्री जितेंद्र कुमार सिंह , विनय कुमार यादव ने  नेता जी को माल्यार्पण और पुष्पांजलि कर  किया। इस कार्यक्रम में  पूर्व सैनिक और उनके परिवार के लोग, समाज में कार्य करने वाले सामाजिक लोग उपस्थित थे। नेताजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए विनय कुमार यादव ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को युवाओं का प्रेरणास्रोत बताया और शस्त्र और शास्त्र के साथ सम्यक रूप से चलने वाला बताया। पूर्व सैनिक जितेंद्र कुमार सिंह ने नेताजी के जीवन एवम राष्ट्र के प्रति उनके

NamantoNetaji

 योगदान के विषय मे संक्षिप्त परिचय दिया और कहा कि जीवन के कठिन समयों में भी सही और साहसिक निर्णय लेने वाले नेताजी राष्ट्र के प्रथम प्रधानमंत्री थे जिन्हें तत्कालीन विश्व के कई देशों में मान्यता प्रदान की थी। आज सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में देश के  'पराक्रम दिवस' का अनुभव आम बगान मैदान मे हो रहा था क्युकी नेता जी का नारा 'जय हिंद' माँ भारती कि जयकार 'भारत माता की जय' से पूरा नेताजी सुभाष मैदान, साकची गुंजायमान हो रहा था। कार्यक्रम के संयोजक राज कुंज शर्मा जी ने कार्यक्रम का संचालन के लिए  विनय कुमार यादव जी को आमन्त्रित किया| कार्यक्रम के प्रारंभ में महामंत्री जितेंद्र कुमार सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित अन्य लोगों का परिचय कराया ।  संगठन के डीएन सिंह ने धन्यवाद किया और नेता जी को याद करते हुए भारतीय नौसेना में अंडमान व निकोबार द्वीप कि सेवा को याद किए। कार्यक्रम में उपस्थित  प्रतिबद्धता प्रदान की। आज के कार्यक्रम में नवेंदु गांगुली, वरुण कुमार ,वेद प्रकाश, संतोष कुमार,  संजीव कुमार निरंजन शर्मा, निर्मल कुमार, सुखविंदर सिंह रमेश प्रसाद प्रेम नाथ ढोक, डी के सिंह, नवीन कुमार सिंह, संजीव कुमार, विजय कुमार, विनेश नवीन कुमार, गौतम लाल, राजीव कुमार, जसवीर सिंह,और भी लगभग 35 पूर्व सैनिक उपस्थित थे। 

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Wednesday, 2 October 2024

जय जवान, जय किसान, जिससे देश बना महान - हरी राम यादव

 जय जवान, जय किसान का नारा 1965  के बाद देश के हर बच्चे, बूढ़े और युवा की जबान पर था, बच्चे गलियों में चलते हुए यह नारा लगाया करते थे । एक बच्चा जय जवान बोलता था तो साथ का दूसरा बच्चा जय किसान बोलता था ।  इस नारे को देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल  बहादुर शास्त्री ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान दिया था, उस समय देश के सैनिक  सीमा पर देश की सुरक्षा के लिए लड़ रहे थे और किसान खेतों में अन्न उपजाने के लिए संघर्ष कर रहे थे । उस समय  देश को एकजुट और आत्मनिर्भर बनाने की सख्त ज़रूरत थी।  शास्त्री जी ने अपने इस नारे के द्वारा किसानों और जवानों  दोनों का सम्मान बढ़ाया और देश के नागरिकों  को यह एहसास कराया कि जवान और किसान दोनों देश के लिए रीढ़ की हड्डी हैं। इस नारे के द्वारा उन्होंने पूरे देश को एक नई दिशा दी और इस दिशा ने कुछ  ही वर्षों में देश की दिशा और दशा बदल कर रख दी। देश खाद्यान्न के  मामले में आत्मनिर्भरता की और  बढ़ चला और 06 वर्षों बाद ही सन 1971 में देश ने अपनी सैनिक शक्ति के बलबूते  पाकिस्तान के दो टुकड़े कर “जय जवान और जय किसान” के नारे को सार्थक कर दिया ।


देश के पहले प्रधानमत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु की आकस्मिक मृत्यु  के पश्चात शास्त्री जी  09 जून 1964 को देश के प्रधानमंत्री बने ।  वह  अपने सादे जीवन और नैतिक मूल्यों के लिए जाने जाते थे ।  वे बहुत ही सामान्य जीवन जीते थे और दिखावे से सदैव दूर रहते थे  । देश के प्रधानमंत्री होते हुए भी, उनके पास न तो ज्यादा धन-संपत्ति थी और न ही कोई दिखावे वाली जीवनशैली ।   उनका जीवन एक साधारण व्यक्ति जैसा रहा, कार्यकाल के दौरान मिलने वाले  वेतन और भत्ते से ही अपने पूरे परिवार का भरण पोषण करते थे। सच्चाई और इमानदारी उनकी रग रग में बसी थी । एक बार उनके बेटे ने प्रधानमंत्री कार्यालय की गाड़ी का उपयोग कर लिया, जब यह बात  शास्त्री जी को पता चली तो उन्होंने सरकारी खाते में गाड़ी जितनी दूर चली थी उसका किराया जमा करवाया। उनके  पास न तो खुद का घर था और न ही कोई अन्य संपत्ति। जब उनका  निधन हुआ तो उनके पास जमीन जायदाद नहीं बल्कि एक ऋण था, जो उन्होंने प्रधानमंत्री बनने पर कार खरीदने के लिए सरकार से लिया था। इस सरकारी ऋण से उऋण होने के लिए परिवार ने उनकी पेंशन की राशि से यह राशि जमा की। वह हमेश खादी की धोतो और कुर्ता  पहनते थे । वह 11 जनवरी 1966 को अपनी मृत्यु तक लगभग अठारह महीने भारत के प्रधानमन्त्री रहे। 1965 के भारत पाकिस्तान के मध्य हुए युद्ध में उन्होंने ऐसे ठोस और दूरदर्शी निर्णय लिए कि सैन्य कमांडर भी हतप्रभ थे ।

प्रधानमत्री बनने से पूर्व वह रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, गृह मंत्री रहे। उनके रेल मंत्री रहते हुए 02 सितंबर, 1956 को आंध्र प्रदेश के महबूबनगर में हुई सिकंदराबाद-द्रोणाचलम पैसेंजर ट्रेन दुर्घटना में 125 लोग मारे गए, इस दुर्घटना के लिए स्वयं को जिम्मेदार मानते हुए उन्होंने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। देश तथा संसद में उनकी  इस अभूतपूर्व पहल को काफी सराहा गया । तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने इस घटना पर संसद में बोलते हुए शास्त्री जी की ईमानदारी एवं उच्च आदर्शों की काफी सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने “लाल बहादुर शास्त्री का इस्तीफा इसलिए नहीं स्वीकार किया है कि जो कुछ हुआ वे इसके लिए जिम्मेदार हैं बल्कि इसलिए स्वीकार किया है क्योंकि इससे संवैधानिक मर्यादा में एक मिसाल कायम होगी”। रेल दुर्घटना पर  बहस का जवाब देते हुए लाल बहादुर शास्त्री ने कहा “शायद मेरे लंबाई में छोटे होने एवं नम्र होने के कारण लोगों को लगता है कि मैं बहुत दृढ नहीं हो पा रहा हूँ। यद्यपि शारीरिक रूप से में मैं मजबूत नहीं है लेकिन मुझे लगता है कि मैं आंतरिक रूप से इतना कमजोर भी नहीं हूँ।” ऐसे थे लाल बहादुर शास्त्री । जहाँ आज एक तो क्या चार पांच दुर्घटनाए होने के बाद और नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा मांगने के बाद भी लोग पद से नहीं हटते ।

लालबहादुर शास्त्री का जन्म 02 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय  में श्रीमती  रामदुलारी और मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव के यहाँ हुआ था। उनके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे इसलिए गांव के  सब लोग उन्हें मुंशीजी  कहते थे। परिवार में सबसे छोटा होने के कारण गांव के बड़े बुजुर्ग लालबहादुर शास्त्री को प्यार में नन्हें कहकर बुलाया करते थे। अठारह महीने की छोटी सी उम्र में इनके पिता का निधन हो गया। पिता के निधन के पश्चात  उनकी माँ श्रीमती रामदुलारी अपने मायके मिर्ज़ापुर चली गयीं। कुछ समय बाद उसके नाना का भी निधन हो गया । शास्त्री जी की परवरिश करने में उसके मौसा रघुनाथ प्रसाद ने उनकी माँ का बहुत सहयोग किया। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा अपने ननिहाल के गांव में  ग्रहण की और उसके पश्चात उनकी आगे की शिक्षा हरिश्चन्द्र हाई स्कूल और काशी विद्यापीठ में हुई। काशी विद्यापीठ से जब उन्हें शास्त्री की उपाधि मिली तब उन्होंने अपने नाम के पीछे से श्रीवास्तव शब्द  हमेशा हमेशा के लिये हटा दिया और नाम के साथ  'शास्त्री' लगा लिया। इसके पश्चात् शास्त्री शब्द उनके  नाम का पर्याय बन गया। सन 1927 में उनकी शादी मिर्जापुर की ललिता देवी से हुई । इनके परिवार में इनके चार बेटे – हरिकृष्ण शास्त्री , सुनील शास्त्री , अनिल शास्त्री तथा अशोक शास्त्री एवं दो बेटियां कुसुम शास्त्री और सुमन शास्त्री हैं । सन 1966 में भारत सरकार द्वारा उन्हें भारत रत्न से विभूषित किया गया ।

वर्तमान समय में सत्ता और विपक्ष में बैठे देश के नीति निर्माताओं को लाल बहादुर शास्त्री के जय जवान, जय किसान के 60 वर्ष पहले दिए नारे के बारे में गंभीरता से  सोचने की आवश्यकता है। यह एक बहुत ही दूरदर्शी नारा है। जिस देश की सीमा पर खड़ा जवान और देश के लिए अन्न उपजाने वाला किसान सुखी और सम्पन्न है, समझो वह पूरा देश सुखी है, समाज में इन दोनों के चेहरे पर  खुशहाली लाए बिना देश को विकसित और खुशहाल नहीं बनाया जा सकता। इन दोनों वर्गों की समस्याओं के समाधान का रास्ता तलाशना ही होगा। शास्त्री जी का यह नारा आज भी सार्वभौमिक, सर्वकालिक और संसार के सभी देशों के लिए ग्राह्य है।

हरी राम यादव 
7087815074